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Padebaba

Sunday, May 15, 2011

हमने मौत रानी से कहा …

अन्य गुणों के अतिरिक्त, भारतवर्ष अतिथि-सत्कार के लिए भी प्रसिद्ध है ;
प्रस्तुत कविता में हमारी चौखट पर हमसे मौत रानी मिलने आयीं तो क्या कुछ
हुआ , एक छोटी सी हास्य कविता के माध्यम से , आप तक पहुंचा रहा हूँ , आशा
है आपको पसंद आएगी ..  अतिथि यदि मनपसंद न हो और सख्त हो तो टालना आसान
नहीं होता , अब आ ही गयीं थीं ..हमने मौत रानी से कहा …

आई हो तो पास बैठो पल दो पल ओ मौत रानी
बताओ क्या लायें कुछ चाय नाश्ता कॉफ़ी पानी
मौत रानी बोलीं मुझे कुछ नहीं चाहिए
आखरी कोई इच्छा हो तो बतलाइए
हमने कहा ऐसी भी किया जल्दी है बताइए
पंखा चला देता हूँ आराम फरमाइए
त्योरी चढ़ाकर वो बोलीं बात करते हो प्यारे
भैंसा साथ लायी हूँ झट चढ़ जाईये

हमारे यहाँ टाइम ऑफिस का सिस्टम ज़रा सख्त है
याद आया होने वाला लंच का भी वक्क्त है

मौका पाते खाने का प्रस्ताव हमने रख दिया
कहा हाथ धोके डाइनिंग टेबल पर आजाइए
मना वो भी कर न सकीं भूख लग आई थी
हमसे बोलीं भैंसे को भी चारा डलवाइये
हम भी कहाँ कम थे कहा भैंसा कबसे चर रहा
पड़ोस की भैंस के साथ टाइम पास कर रहा
खाने की महक के रस्ते टेबल पे वे आगईं
देखते देखते रखा सारा खाना खा गयीं
डकार लेते वो बोलीं पानी तो ले आइये
पेट में जगह है बाकी स्वीट डिश लाइए
खोज-बीन कर हम मिठाई लेके आते हैं
बर्फियों के संग टाटा बाय कर आते हैं

इस तरह हमने मौत रानी को लौटाया है
पिछली दिवाली की मिठाई से पटाया है

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