Powered By Blogger

Padebaba

Wednesday, May 4, 2011

1.हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है
वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है,
तुम्हारे और मेरे बीच में फिर से ज़माना है



2.तु मुझको मिल नहीँ सकती मैँ तुझको खो नही सकता
तेरी रुसवाइयोँ से भी मुझे कुछ हो नही सकता
तु क्या समझे मेरे दिल पर हुए हैँ वार कितने ही
मैँ हरगिज चोट फिर से और कोई खा नही सकता।

No comments:

Post a Comment