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Padebaba

Monday, May 9, 2011

एक राम ढूंढता हूँ

सिर्फ भवनों और सड़को की जमावट है, कहलाता है शहर है,
यहाँ वृक्षों की शीतल छाँव और शहर में गाँव ढूँढ़ता हूँ |१|
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ओढ़ना कफ़न पर तिरंगा होता है बिरलो का सुभाग,
मातृभू पर कुर्बान जाऊं, नित ही ऐसा दांव ढूँढ़ता हूँ |२|
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मानूँ है सब यथा सुखी, है सब साधन सुविधा उपलब्ध,
देव निवास कर सके, ऐसा एक दर धाम ढूँढ़ता हूँ |३|
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है सब प्राणी ईश्वर की संतान, है हर शरीर में ईश्वर का वास,
इससे एकमय हो गया हो, ऐसा एक भी, इंसान ढूँढ़ता हूँ |४|      
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थोड़ा कुछ जो संतोष है, जीवन में भगवान का प्रसाद है,
बनी रही कृपा उसकी, मौके होता रहे ऐसे अविराम, बार बार ढूँढ़ता हूँ |5|
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जीवन बीत रहा दौड़ भाग कर, हर काम ईश्वर का  काम है,
करूँ मन भर के आभार ईश का, ऐसा एक विराम ढूँढ़ता हूँ |६|
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इच्छाए, चिंताए कभी कम न होगी, है ये अनंत गागर,
विलोपन हो या पा जाऊं सारी प्यास, ऐसा मगर एक सागर ढूँढ़ता हूँ |७|
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है अनंत कथा इस खोज की, मनुजतन फिर मिला इसलिए,
खोजता हूँ फिर वही, वही इक राम ढूँढ़ता  हूँ |८|      

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